भज-गोविन्दम
शनिवार, 16 अप्रैल 2011
माँ की याद
माँ याद तुम्हारी आते ही,
जल बरसाने लगते हैं नयन.
रसना भी मूक हो जाती है,
मुख अन्दर घुल जाते हैं बयन.
तुम पास हो या सुदूर कहीं,
कुछ भी कर पाती नहीं चयन.
आशीष सदां पाती हूँ साथ,
सुखदे ! माँ तुमको कोटि नमन.
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