प्रभु अपने भक्तन हित लागी
सहत कष्ट, उपकार करतयो, ऐसे दीन अनुरागी.
द्रुपद सुता ने टेर करी जब, भैया कह के पुकारी,
इक चिंदी का मोल चुकायो, दीनी कोटिन सारी.
प्रभु अपने भक्तन हित लागी.
गज और ग्राह लड़े जल भीतर, गज ने प्रभुहि पुकारी
शरणागत वत्सल प्रभु आये, नंगे पाँवो भागी.
प्रभु अपने भक्तन हित लागी.
संत सखू पूजा को जावें, सासू जी देवे गारी
सखू के बदले घर आँगन में, नाथ लगाए बुहारी.
प्रभु अपने भक्तन हित लागी.
नरसी मेहता पाती धर दी, श्री चरणों के मंझारी
ले मामेरा पहुँच गये तहँ, बन सांवल व्यापारी.
प्रभु अपने भक्तन हित लागी.
ऐहो शरणागत वत्सल प्रभु, मैं भी आयी शरण तिहारी
भव सागर से पार कराना, अब है मेरी बारी.
प्रभु अपने भक्तन हित लागी.
प्रभा तिवारी
