मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ
आनन चन्द्र छटा छवि भारी,
दरसन उनके त्रय ताप हारी.
आनंदमय सदा कल्याणकारी,
उनसे बंधी प्रेम डोरी गुइंयाँ.
मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ.
मस्तक जिनके चन्द्र विराजे,
हाथ में डमरू डम-डम बाजे.
गंगा की धारा से शीतल मनवा,
राम को मन्त्र भिजोरी गुइंयाँ.
मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ.
सर्प जनेऊ, माल, मृगछाला,
ध्यान में रहते सदा मतवाला.
दायें हाथ त्रिशूल विराजेसो,
बाएँ हाथ पर गौरी गुइंयाँ.
मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ
मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ.
आनन चन्द्र छटा छवि भारी,
दरसन उनके त्रय ताप हारी.
आनंदमय सदा कल्याणकारी,
उनसे बंधी प्रेम डोरी गुइंयाँ.
मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ.
मस्तक जिनके चन्द्र विराजे,
हाथ में डमरू डम-डम बाजे.
गंगा की धारा से शीतल मनवा,
राम को मन्त्र भिजोरी गुइंयाँ.
मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ.
सर्प जनेऊ, माल, मृगछाला,
ध्यान में रहते सदा मतवाला.
दायें हाथ त्रिशूल विराजेसो,
बाएँ हाथ पर गौरी गुइंयाँ.
मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ
सच्चिदानंद प्रभु अवश्य करेंगे,
सारे कलुष मेरे मन के हरेंगे.
मुझको अपने प्रेम रंग रंग कर,
भव बंधन देंगे छोरी गुइंयाँ.
मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ.
....प्रभा तिवारी

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