बुधवार, 27 मार्च 2013

मैं खेलूंगी होरी

मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ 

आनन चन्द्र छटा छवि भारी,
दरसन उनके त्रय ताप हारी.
आनंदमय सदा कल्याणकारी,
उनसे बंधी प्रेम डोरी गुइंयाँ.


मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ.

मस्तक जिनके चन्द्र विराजे,
हाथ में डमरू डम-डम बाजे.
गंगा की धारा से शीतल मनवा,
राम को मन्त्र भिजोरी गुइंयाँ.


मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ.

सर्प जनेऊ, माल, मृगछाला,
ध्यान में रहते सदा मतवाला.
दायें हाथ त्रिशूल विराजेसो, 
बाएँ हाथ पर गौरी गुइंयाँ.


मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ 

सच्चिदानंद प्रभु  अवश्य करेंगे,
सारे कलुष मेरे मन के हरेंगे.
मुझको अपने प्रेम रंग रंग कर,
भव बंधन देंगे छोरी गुइंयाँ.

मैं तो खेलूंगी उनहि से होरी गुइंयाँ.

....प्रभा तिवारी 


मंगलवार, 26 मार्च 2013

खेलो श्री राम रंग की होली

श्री राम रंग में मन रंग डारो, कबहुं न छुट पाए,
होली में अबकी राम के हो लो, अवहु न हुइ पाए.

सत् चिंतन का अबीर बनालो, सद् भावों की पिचकारी,
प्रभु का रंग भरो दे मारो, जिनकी कोरी सारी.
दुष्कर्मों की होली जला दो, मैल न रह जाए,
श्री राम रंग में मन रंग डारो, कबहुं न छुट पाए.

सुमति की झाँझें, सुरत के मंजीरा, मन को मृदंग बनाओ,
भक्ति भाव के तबला सारंगी, प्रेम की बीन बजाओ.
अनहद नाद की होली गीत सुनो, समय न चुक जाए,
श्री राम रंग में मन रंग डारो, कबहुं न छुट पाए.

ये रंग और अबीर लगे मन, तब पाओ नैसर्गिक आनंद,
यह संघटु न होय सद्गुरु बिन, मगन रहो मन 
पल-पल छिन छिन, सद गुरु के साए,
श्री राम रंग में मन रंग डारो, कबहुं न छुट पाए.

प्रभा तिवारी 

शनिवार, 9 मार्च 2013

श्री कृष्ण का बाल रूप

वनमाल हिए विच शोभित है,
अरु माथे पै मोतिन की अवली.
अधरारुण बीच दिखें दंतियाँ,
चपल द्युति सी, मानो लागै भली.
कंचन किंकिणिया कटि सोहे,
अरु पैंजनियां पग बाजे भली.
यशुदा ढिंग शोभित श्याम लला,
पहिरे रंग पीत रंगी झंगुली.

प्रभा तिवारी