रविवार, 19 फ़रवरी 2012

जय-शिव

               जय शिव हर, हर, हर, महादेव,
इस मन के कलुष सब हर लो, प्रभु जीवन पावन कर दो,
               जय शिव हर, हर, हर, महादेव.


राग, द्वेष, ईर्ष्या माया में, मन ये बंधा फिरता है.
मोह, मान, अज्ञान के तम से, पापी नित घिरता है.
आत्म ज्ञान का तुम प्रकाश भर,इसको झिलमिल कर दो.
               जय शिव हर, हर, हर, महादेव.


भटक रहा जंजालों में और अटक रहा भव फंदों में.
देख के देख नहीं पाता है, इसकी गिनती अंधों में.
अंतर नेत्र खोल कर भगवन, ज्योतिर्मय मन कर दो.
               जय शिव हर, हर, हर, महादेव.


संसारी नातों की मृग-तृष्णा में दौड़ लगाता है,
भक्ति प्रेम की गंगा सतसंग, उसमें नहीं नहाता है.
ओस कणों से प्यास बुझे ना, तव प्रेमामृत भर दो.
               जय शिव हर, हर, हर, महादेव.


है आलस्य प्रमाद भरी यह आत्मा इसे जगा दो,
स्थूल, सूक्ष्म,कारण शरीर के, रोग और दोष मिटा दो.
ज्योति-ज्योति से मिल जाए, हे सच्चिदानंद यह वर दो.
               जय शिव हर, हर, हर, महादेव.


प्रभा तिवारी 

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

करुण प्रार्थना त्रयतापहारी से

दया हो तुम्हारी, त्रयतापहारी, सुनो भोले बाबा.


          तुम उपकारी, तुम हितकारी,
          निज दासों के तुम सुखकारी.
शरण में तुम्हारी आई, मैं दुखहारी सुनो भोले बाबा,
दया हो तुम्हारी, त्रयतापहारी, सुनो भोले बाबा.


          जग में आकर मैं तो भरमाई,
          करी मनमानी अब हुई बौराई.
दुःख उठाऊँ भारी, पछताऊं भी अनारी सुनो भोले बाबा,
दया हो तुम्हारी, त्रयतापहारी, सुनो भोले बाबा.


          तप साधन कछु कर ना पाऊँ,
          इस जीवन को वृथा गंवाऊँ.
यह चिंता है भारी, क्या अंत हो पुरारी सुनो भोले बाबा,
दया हो तुम्हारी, त्रयतापहारी, सुनो भोले बाबा.


          तन मन में है विकार समाया,
          हे प्रभु लपटी गाढ़ी माया.
मैं ठगी विचारी, तुमको पुकारी सुनो भोले बाबा,
दया हो तुम्हारी, त्रयतापहारी, सुनो भोले बाबा.


प्रभा तिवारी 

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

सांचा नाम

सांचा तेरा नाम, जगत सब झूठा.
    जो जाना सो आनंद लूटा.

जग से जिसने चाह बिसराई,
प्रभु चरनन में लगन लगाई.
भव दुखों से सो जन छूटा.
सांचा तेरा नाम, जगत सब झूठा.

सब जग को अपने सम जाने,
उसको हैं सब ओर ठिकाने.
तोड़ परिधि वह गगन में फूटा.
सांचा तेरा नाम, जगत सब झूठा.

अपने मन को जीत लिया है,
देना जिसने सीख लिया है.
अपनापन उसे मिला अटूटा.
सांचा तेरा नाम, जगत सब झूठा.

आज्ञा पालन दृढ-व्रत लिया है,
पूर्ण समर्पण गुरु को किया है.
उसका ह्रदय प्रभु चरण का बूटा.
सांचा तेरा नाम, जगत सब झूठा.

ह्रदय सिंहासन प्रभु को बिठाया,
जान गया सो प्रभु की माया.
माया रहित उस मन का 'राम चरण' खूंटा.
सांचा तेरा नाम, जगत सब झूठा.

प्रभा तिवारी