गुरुवार, 22 सितंबर 2011

कामना निवेदन

क्षणिक दया की दृष्टि नाथ अगर हो जाए।
तुम्हारे प्रेम में हे नाथ मन ये खो जाए ॥
विकार हों दूर मन के, ये पूर्ण निर्मल हो। 
हो तृप्त आत्मा, चरणों में तेरे सो जाए॥

हो ध्यान मेरा सदा आंतरिक उजाला पर,
रहे दिन रात तेरा नाम श्वास माला पर। 
जगत को भूले तेरे स्मरण में खो जाए,
क्षणिक दया की दृष्टि नाथ अगर हो जाए।। 

पूर्ण विश्वास से ये मन तुम्ही से आशा रखे,
भटकना छोड़े सदा तुमको अपने पास लखे। 
तुझे अपना कहे और तेरा अपना हो जाए,
क्षणिक दया की दृष्टि नाथ अगर हो जाए।। 


मंगलवार, 13 सितंबर 2011

मनोकामना

वह शक्ति मुझे दो दयानिधे, कुछ सेवा जगत की कर पाऊं,
संसार कुमति से नित्य दुखी, भावों से सुमति उर भर पाऊं.
                 बड़ी आशा से नाथ तुमको पुकारा.


                 सदा ही काम आऊँ जन के दुःख में,
                 जो चाहें उनको बन जाऊं सहारा.
                 बड़ी आशा से नाथ तुमको पुकारा.


                 सभी जन मुझसे सुख पायें सदा ही,
                 न दुःख पाए कभी कोई मेरे द्वारा.
                 
बड़ी आशा से नाथ तुमको पुकारा.



                 क्षमा, प्रेम इस उर में इतना भरो प्रभु,
                 लुटाऊँ जगत को बन जननी उदारा.
                 बड़ी आशा से नाथ तुमको पुकारा.


                 बना दो स्तिथि-प्रग्य अब इस ह्रदय को,
                 कि अपना ही सा लागे संसार सारा.
                 बड़ी आशा से नाथ तुमको पुकारा.


                 चला दो वही राह तुम तक जो आती,
                 कि आना पड़े ना जगत में दुबारा.
                 बड़ी आशा से नाथ तुमको पुकारा.

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

तुम्हारे चरण में

तुम्हारे चरण मैं आकर, मैं जग को भूल भूल जाती हूँ,
   भटकते भोगते मन में, यहीं पर शान्ति पाती हूँ.

सदा बांधे रहो हे नाथ, निज चरणों में ही मुझको,
कि इनसे दूर हो जग में, सदा ही भ्रान्ति पाती हूँ.

सभी नाते व सुख वैभव, लगे संताप दायी ही,
तुम्हारे ध्यान से सामीप्य में विश्रांति पाती हूँ.