क्षणिक दया की दृष्टि नाथ अगर हो जाए।
तुम्हारे प्रेम में हे नाथ मन ये खो जाए ॥
विकार हों दूर मन के, ये पूर्ण निर्मल हो।
हो तृप्त आत्मा, चरणों में तेरे सो जाए॥
हो ध्यान मेरा सदा आंतरिक उजाला पर,
रहे दिन रात तेरा नाम श्वास माला पर।
जगत को भूले तेरे स्मरण में खो जाए,
क्षणिक दया की दृष्टि नाथ अगर हो जाए।।
पूर्ण विश्वास से ये मन तुम्ही से आशा रखे,
भटकना छोड़े सदा तुमको अपने पास लखे।
तुझे अपना कहे और तेरा अपना हो जाए,
क्षणिक दया की दृष्टि नाथ अगर हो जाए।।

