जग बोल रहा जयकारे,
दिन फिर जायेंगे हमारे.
भारत भूमि पर लखो आज,
जीते हैं कोटि हजारे.
अब भ्रष्टाचार मिटेगा,
और सद आचार लुटेगा.
बरसेगी शान्ति भूमि पर,
कष्टों के बुझेंगे अंगारे,
जीते हैं कोटि हजारे.
एक देवदूत लो आया,
उसने सबको समझाया.
मत उसका सबको भाया,
क्या हैं अधिकार हमारे,
जीते हैं कोटि हजारे.
जनता ने बहुत सहा है,
पर ये ही सदा कहा है.
अन्याय न रहने देंगे,
बदलेंगे कटु नियम सारे,
जीते हैं कोटि हजारे.
इस देश का दूजा गांधी,
उसने चलायी है आंधी.
भूल के खुदी को, सब भारतीय
कहने लगे खुद को हजारे,
जीते हैं कोटि हजारे.

