रविवार, 28 अगस्त 2011

जीते हैं कोटि हजारे

जग बोल रहा जयकारे,
दिन फिर जायेंगे हमारे.
भारत भूमि पर लखो आज,
जीते हैं कोटि हजारे.

अब भ्रष्टाचार मिटेगा,
और सद आचार लुटेगा.
बरसेगी शान्ति भूमि पर,
कष्टों के बुझेंगे अंगारे,
जीते हैं कोटि हजारे.

एक देवदूत लो आया,
उसने सबको समझाया.
मत उसका सबको भाया,
क्या हैं अधिकार हमारे,
जीते हैं कोटि हजारे.

जनता ने बहुत सहा है,
पर ये ही सदा कहा है.
अन्याय न रहने देंगे,
बदलेंगे कटु नियम सारे,
जीते हैं कोटि हजारे.

इस देश का दूजा गांधी,
उसने चलायी है आंधी.
भूल के खुदी को, सब भारतीय
कहने लगे खुद को हजारे,
जीते हैं कोटि हजारे.

शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

मन चिंतन प्रार्थना

यही चिंतन हो नाथ अगले सवेरे,
रहें मन को प्रति पल ही सद्भाव घेरे.

कि हर पल हो चिंतन तुम्हारा ह्रदय में,
मन भी सतत हो तुम्हारे विषय में.
सुमति मन रहे, और सत्संग पाऊं,
फिरें श्वास माला में नामों के फेरे.

कि मिथ्या औ' सत का सदा भान हो,
उचित और अनुचित का भी ज्ञान हो.
क्षमा, प्रेम, करुणा तजे न ह्रदय को,
सहज सेवा में रत रहें अंग मेरे.

करूं कर्म निष्काम, जागृत रहूँ मैं,
कि रह कर भी जग में, विलग ही रहूँ मैं.
कभी लक्ष्य से अपने भटकूँ न गुरुवर,
सतत द्रष्टि तुमरी रहे मुझको हेरे.

यही चिंतन हो नाथ अगले सवेरे,
रहे मन को प्रति पल ही सद्भाव घेरे.



रविवार, 21 अगस्त 2011

श्री कृष्ण का बाल रूप

वनमाल हिए विच शोभित है,
           अरु माथे पै मोतिन की अवली.
अधरारुण बीच दिखें दँतियाँ,
           चपल द्युति सी, मानो लागै भली.
कंचन किंकिणिया कटि सोहे,
           अरु पैंजनियां पग बाजे भली.
यशुदा ढिंग शोभित 'श्याम लला',
           पहिरे रंग पीत रंगी झंगुली.

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

अभिलाषा

तेरी पूजा प्रभु जग के हरेक काम में हो,
तेरा दर्शन प्रभु जग के हर नाम में हो.

बना रहे सतत ही सत् चिंतन,
और सद्भावना निसृत निस दिन.
नाथ सत्कर्म ही करने का मेरे ध्यान में हो,
तेरी पूजा प्रभु जग के हरेक काम में हो.

नित्य बढती रहे श्रद्धा भक्ति,
लगे परमार्थ में सदा शक्ति.
जो किनारे पे लगा दे वही मग ज्ञान में हो,
तेरी पूजा प्रभु जग के हरेक काम में हो.

क्षमा, दया व धैर्य इतना दो,
त्याग की भावना भी उतनी हो.
डूब जाए ये जगत इतना 'प्रेम' दान में दो,
तेरी पूजा प्रभु जग के हरेक काम में हो.

सदा सहज, सरल मन, मेरा निरहंकार रहे,
तत्व दर्शन प्रकाश, मेरे दशम द्वार रहे.
आत्मा उसमें रमे मोह अन्धकार न हो,
तेरी पूजा प्रभु जग के हरेक काम में हो.


गुरुवार, 11 अगस्त 2011

मन को सलाह

मगन रहो मनवा, राम गुन गायके,
क्या पाओगे जगत को रिझाय के.

जिसको मानोगे इस जग में अपना,
बेगाना वो ही लगेगा, ज्यूँ सपना,
दुःख ही पाओगे ममता लगाय के.
मगन रहो मनवा, राम गुन गाय के.

ये जग के नाते झूठे हैं सारे,
ठोक बजा कर परख ले प्यारे,
इनमें न रम तू गुरु को विहाय के.
मगन रहो मनवा, राम गुन गाय के.

जिसने नातों को अपना माना,
उसने पाए हैं दुःख ही नाना,
अंत गया है वही पछताय के.
मगन रहो मनवा, राम गुन गाय के.

साथ रहेगा नाम, जो है सांचा,
सुख भी नाम से मिलत मनराँचा,
उसको सुमर ले, जगत विसराय के.
मगन रहो मनवा, राम गुन  गाय के.

सोमवार, 1 अगस्त 2011

पावन-सावन

रिम झिम - रिम झिम, पडत फुहार चहुँ,
मलय समीर बहै, समय सुहावन है.
छाये घनश्याम देख, टेरत मयूर वृन्द,
आओ-आओ श्याम, छोड़ें तान मन भावन है.
एक सुतिथि में बांधे, बंधुओं को राखी हम,
इस प्रिय मास का, शुभ नाम सावन है.
राखो लाज हमरी, हमारे रक्षाबंधन की,
बन्धु यह सावन, पुनीत और पावन है.