गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011

प्रभु से अरज़ी

नाथ देरी दया में नहीं कीजिये,
बात बनकर भी मेरी बिगड़ जायगी.
लोग मुझ पर हंसेगे, और कुछ तुम पे भी,
जो दया में कमी थोड़ी पड़ जायगी.


मेरा विश्वास है जो, वह उनका नहीं,
उनको पर्वत है जो, तुमको तिनका नहीं.
ध्यान यदि न दिया दासी की अर्ज़ पर,
मेरी किश्ती किनारे से लड़ जायगी.


अपनी महिमा दयालू दिखा दीजिये,
इतनी किरपा अब दासी पै कर दीजिये.
लाज से सिर मुझे गर झुकाना पड़ा,
बात तब वह तुम्हारे पै जड़ जायगी.




तुमको अपना जगत को बताया मैंने,
दया का अपनापन भी जताया मैंने.
सामना कैसे उनका मैं कर पाऊँगी,
अपनापन न मिला दासी गढ़ जायगी.



नाथ देरी दया में नहीं कीजिये,
बात बनकर भी मेरी बिगड़ जायगी.

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

अनुभूति

आ गयी अब जीवन में शाम,
करना चाहूं अब विश्राम,
करके किरपा अपने धाम,
आने दो आना है.

समझ पड़ा झूठा संसार,
झूठे नाते झूठा प्यार,
पाया सब झूठा व्यवहार,
भुलाने दो भुलाना है.

झूठ से जग बौराया है,
सत्य को झूठ बताया है,
हित करके दुःख पाया है,
छुटाने दो छुटाना है.

अपनों से कोई आस नहीं,
किसी का भी विश्वास नहीं,
यह जग मुझको रास नहीं,
मिटाने दो मिटाना है.

जग की ओर मन अब न लगे,
अपना सा अब कुछ न लगे,
अब तुम अपना लो,  
श्री राम गाने दो गाना है.

सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

जय जगदम्बे

जयो-जयो माँ जगदम्बे 
दुःख विनाशिनी, 
तुम सुखकारिणी,
मंगल मूरति जय अम्बे.
जयो-जयो माँ जगदम्बे.

जय जय हे महिषासुरमर्दिनी , 
दंभ कपर्दिनी शैल सुते.
जयो-जयो माँ जगदम्बे.

आदी मध्यांत रहित भवानी,
सारे सुर तव चरण पड़े.
जयो-जयो माँ जगदम्बे.

सर्व समर्थ सर्वगत देवी 
सर्वमयी तुम्हें संत कहे.
जयो-जयो माँ जगदम्बे.

सत् चिंतन सद् भाव भरे उर,
सद् विचार दासन्ह में धरे.
जयो-जयो माँ जगदम्बे.

जब लगि जियूँ चरण न छोडूँ,
मैं तेरी कहलाऊं अम्बे.
जयो-जयो माँ जगदम्बे.