नाथ देरी दया में नहीं कीजिये,
जो दया में कमी थोड़ी पड़ जायगी.
मेरा विश्वास है जो, वह उनका नहीं,
उनको पर्वत है जो, तुमको तिनका नहीं.
ध्यान यदि न दिया दासी की अर्ज़ पर,
मेरी किश्ती किनारे से लड़ जायगी.
अपनी महिमा दयालू दिखा दीजिये,
इतनी किरपा अब दासी पै कर दीजिये.
लाज से सिर मुझे गर झुकाना पड़ा,
बात तब वह तुम्हारे पै जड़ जायगी.
तुमको अपना जगत को बताया मैंने,
दया का अपनापन भी जताया मैंने.
सामना कैसे उनका मैं कर पाऊँगी,
अपनापन न मिला दासी गढ़ जायगी.
नाथ देरी दया में नहीं कीजिये,
बात बनकर भी मेरी बिगड़ जायगी.
लोग मुझ पर हंसेगे, और कुछ तुम पे भी,जो दया में कमी थोड़ी पड़ जायगी.
मेरा विश्वास है जो, वह उनका नहीं,
उनको पर्वत है जो, तुमको तिनका नहीं.
ध्यान यदि न दिया दासी की अर्ज़ पर,
मेरी किश्ती किनारे से लड़ जायगी.
अपनी महिमा दयालू दिखा दीजिये,
इतनी किरपा अब दासी पै कर दीजिये.
लाज से सिर मुझे गर झुकाना पड़ा,
बात तब वह तुम्हारे पै जड़ जायगी.
तुमको अपना जगत को बताया मैंने,
दया का अपनापन भी जताया मैंने.
सामना कैसे उनका मैं कर पाऊँगी,
अपनापन न मिला दासी गढ़ जायगी.
नाथ देरी दया में नहीं कीजिये,
बात बनकर भी मेरी बिगड़ जायगी.
