आरती कीजे श्री गुरुवर की, तारण-तरण जनम दुःख-हर की .
जो भी गुरु की शरण में आया, उसने जीवन सफल बनाया,
जग के दुःख संग, भव दुःख-हर की......
सत्चिंतन - सद्भाव भरें मन, सत्कर्मों को प्रेरित करें मन,
रोग-दोष संशय भ्रम-हर की........
अंत समय जीवन का आवे, गुरु ही भव से पार लगावे,
मृत्यु से मन को निर्भय-कर की.........
आरती कीजे श्री गुरुवर की, तारण-तरण जनम दुःख-हर की !