गुरु वन्दनीय, अभिनन्दनीय
गुरु तारण तरण, स्वयं तरणी.
पतवार स्वयं, कर कंजनीय. गुरुवंदनीय..........
गुरु रामा है, गुरु क्रष्णू हैं,
गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं.
गुरु ही शिव हैं आनंदनीय. गुरु वन्दनीय ..........
गुरु महिमा अमित अपार शक्ति,
पाइये अपने विश्वास भक्ति.
गुरु मन अति कोमल कमनीय. गुरु वन्दनीय......
छल, कपट, दंभ, पाखण्ड तजकर,
पाओगे गुरु की कृपा सुखकर.
गुरु दुर्गुण, दोष निकंदनीय. गुरु वन्दनीय...........
सर्वस्व समर्पण भावना हो,
भक्ति की केवल कामना लो.
गुरु पाओगे अकथनीय. गुरु वन्दनीय, अभिनंदनीय.

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है. बहुत ही भक्तिपूर्ण और श्रद्धा से ओतप्रोत सुन्दर गुरुवन्दना..सादर नमन आपकी लेखनी को..आभार
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