शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

करुण प्रार्थना त्रयतापहारी से

दया हो तुम्हारी, त्रयतापहारी, सुनो भोले बाबा.


          तुम उपकारी, तुम हितकारी,
          निज दासों के तुम सुखकारी.
शरण में तुम्हारी आई, मैं दुखहारी सुनो भोले बाबा,
दया हो तुम्हारी, त्रयतापहारी, सुनो भोले बाबा.


          जग में आकर मैं तो भरमाई,
          करी मनमानी अब हुई बौराई.
दुःख उठाऊँ भारी, पछताऊं भी अनारी सुनो भोले बाबा,
दया हो तुम्हारी, त्रयतापहारी, सुनो भोले बाबा.


          तप साधन कछु कर ना पाऊँ,
          इस जीवन को वृथा गंवाऊँ.
यह चिंता है भारी, क्या अंत हो पुरारी सुनो भोले बाबा,
दया हो तुम्हारी, त्रयतापहारी, सुनो भोले बाबा.


          तन मन में है विकार समाया,
          हे प्रभु लपटी गाढ़ी माया.
मैं ठगी विचारी, तुमको पुकारी सुनो भोले बाबा,
दया हो तुम्हारी, त्रयतापहारी, सुनो भोले बाबा.


प्रभा तिवारी 

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत भक्तिमयी अभिव्यक्ति...ओम नमः शिवाय..सादर

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  2. बहुत अच्छा लेखन है आपका.महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें.

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  3. सुंदर प्रार्थना और सुंदर गीत प्रभु को समर्पित.

    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें.

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  4. ओम नमः शिवाय....
    महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं...

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