वन्दे गौरीशं शिव वन्दे गौरीशं,
(यह आरती मेरे स्व. पितामह श्री गौरीशंकर जी मिश्र के द्वारा रचित है)
त्रिगुणातीत मनादिमनन्तं जगदीशम,
ओम हर, हर हर महादेव.
श्री कैलाश निवासं, पंकज मुख नयनं.
शिव पंकज मुख नयनं,
शशिधर मौलिम शिवदं,
ताप त्रय शमनम.
ओम हर, हर हर महादेव.
ओम हर, हर हर महादेव.
अखंडैक रस रूपं,
जन मन सुख करणं,
शिव जन मन सुख करणं.
सुर पूजित पद पीठं,
कृत भस्मावरणम .
ओम हर, हर हर महादेव.
शरतचन्द्र गौरी छवि, मन्मथ मदहरणम,
शिव मन्मथ मदहरणम,
गौरीशंकर नाथं,
गुण गायक शरणम.
ओम हर, हर हर महादेव.
(यह आरती मेरे स्व. पितामह श्री गौरीशंकर जी मिश्र के द्वारा रचित है)

जय हर हर महादेव!
जवाब देंहटाएंबहुत तेज है शब्दों में... क्या आप इसे वाणी रूप और ताल लय में गा कर ब्लॉग में प्रसारित कर सकतीं है.. ? ..सादर
जवाब देंहटाएंआभार..इस नई आरती के लिए..
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